
सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी समूह को अनिश्चितकाल तक सार्वजनिक जगहों पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने आम जनता के अधिकार को ध्यान में रखने की बात कही है।
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन करने के अधिकार को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने ये स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर सार्वजनिक जगहों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा करके नहीं बैठा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे प्रदर्शनों से आम नागरिकों और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चीफ जस्टिस की बेंच ने की सुनवाई
यह अहम टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अक्टूबर महीने में दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के वकीलों ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के फैसले का विरोध किया। वहीं, दूसरी ओर एक व्यापार संगठन की तरफ से पैरवी करते हुए वकीलों ने कोर्ट को बताया कि लगातार होने वाले इन आंदोलनों और धरनों की वजह से स्थानीय व्यापारीयों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के मुख्य बिंदु:
अनिश्चितकालीन कब्जा मंजूर नहीं: कोर्ट ने माना कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा हैं, लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा जमाए रखना उचित नहीं है।
आम जनता और मजदूरों की आजीविका: अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदर्शनों के दौरान आम लोगों, दुकानदारों और दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पर क्या असर पड़ रहा है, इसका भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।



