
भाजपा सरकार ने आम आदमी पार्टी (आप) के पिछले दस वर्षों के शासन के दौरान राजधानी में कराए गए 20 करोड़ से अधिक राशि वाले उन सभी निर्माण कार्यों की जांच कराने का फैसला लिया है जिनका काम देरी से पूरा हुआ और इस वजह से निर्माण की लागत बढ़ गई।
इसमें देखा जाएगा कि परियोजनाओं में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं। निर्माण कार्यों में घपला करने वालों को भी कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा।
जांच के दायरे में कौन से काम आएंगे?
जांच के दायरे में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से कराए गए विकास कार्य सर्वाधिक होंगे। लोक निर्माण विभाग के पास राजधानी की सड़कों को बनाने से लेकर उनके रखरखाव, सरकारी इमारतों के निर्माण और उनके रखरखाव से लेकर नालों की सफाई की भी जिम्मेदारी है।
कई बार विवादों में रहा है पीडब्ल्यूडी
राजधानी में तमाम फ्लाईओवर और एलिवेटेड कारिडोर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने बनाए हैं और कुछ का निर्माण कार्य जारी है। यह विभाग कई बार विवादों में रहा है और इसके अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे हैं।
इन निर्माण कार्यों की पहले से हो रही है जांच
शीशमहल के पुनर्निर्माण, स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण से लेकर कई ऐसे कार्य हैं, जिनकी सीबीआई, केंद्रीय सतर्कता आयोग, दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा जांच कर रही है।
कुछ अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई
इन मामलों में लोक निर्माण विभाग के कुछ अधिकारियों को निलंबित भी किया गया था, लेकिन कई मामलों में जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के दायरे में नहीं आए थे। अब भाजपा सरकार योजनाओं में देरी और घपला करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
निर्माण कार्यों में घपला करने वालों पर भी गिरेगी गाज
लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और किसी तरीके का भ्रष्टाचार सामने आता है या उसके बारे में कोई जानकारी मिलती है तो किसी भी जिम्मेदार को बख्शा नहीं जाएगा।
सूत्रों की मानें तो उन्होंने कुछ दिन पहले ही उन सभी योजनाओं के बारे में जानकारी मांगी है जो पिछले 10 वर्षों के दौरान पूरी हुई हैं और उनकी लागत बढ़ी है।