
पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और भारत के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने का कोई मौका नहीं छोड़ता। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी (रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल) मजहर जमील ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल पर गंभीर और मनगढ़ंत आरोप लगाए हैं। जमील ने दावा किया कि NSA डोभाल पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए आतंकी संगठनों को शह दे रहे हैं।
क्या है पूरा मामला? (लंदन में दिया भड़काऊ बयान)
Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 अक्टूबर को लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (IISS) के एक कार्यक्रम के दौरान मजहर जमील ने भारत के खिलाफ जहर उगला।
अपनी बौखलाहट में पूर्व पाकिस्तानी जनरल ने निम्नलिखित दावे किए:
- ‘डोभाल डॉक्ट्रिन’ का नाम दिया: जमील ने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान में अस्थिरता फैलाने के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) का समर्थन कर रहा है। उन्होंने इस कथित रणनीति को ‘डोभाल सिद्धांत’ (Doval Doctrine) करार दिया।
- इतिहास के पन्नों से जोड़ने की कोशिश: अपने इस बेबुनियाद दावे को सच साबित करने के लिए जमील ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम (‘मुक्ति वाहिनी’) और 1980 के दशक में श्रीलंका के संगठन ‘LTTE’ को भारत द्वारा दिए गए समर्थन का जिक्र किया।
- अफगानिस्तान का मुद्दा: जमील ने 2001 से 2014 के बीच अफगानिस्तान में भारत की शांतिपूर्ण विकास भूमिका को भी रणनीतिक साजिश के तौर पर पेश करने की कोशिश की।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ब्रह्मोस मिसाइल पर भी उठाए सवाल
पाकिस्तानी जनरल की बौखलाहट यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर भी बेतुके दावे किए:
- जमील ने आरोप लगाया कि भारत की ब्रह्मोस मिसाइल परमाणु (Nuclear) और पारंपरिक (Conventional) दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है।
- दावे की खुली पोल: मजहर जमील का यह दावा पूरी तरह से भ्रामक और बेबुनियाद है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और ब्रह्मोस एयरोस्पेस के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, ब्रह्मोस केवल पारंपरिक (Conventional) वॉरहेड ले जाने के लिए ही डिजाइन की गई है।
पाकिस्तान की पुरानी आदत
पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं, बलूचिस्तान में उठती स्वतंत्रता की आवाज और TTP के हमलों का ठीकरा हमेशा भारत पर फोड़ता रहा है। विदेश मंत्रालय और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयानों का मकसद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की वैश्विक साख को नुकसान पहुंचाना और अपनी घरेलू नाकामियों से जनता का ध्यान भटकाना है।



