‘रील्स देखने में बर्बाद न करें समय…’, अमेठी में युवाओं से बोलीं अपर्णा यादव- महिलाओं की योजनाओं की लें जानकारी

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव (Aparna Yadav) अपने बयानों और सक्रियता को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैं। हाल ही में अमेठी पहुंचीं अपर्णा यादव ने युवाओं को एक खास सलाह दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और फोन पर रील्स देखने वाले युवाओं को नसीहत देते हुए कहा कि वे अपना समय रील्स देखने में बर्बाद न करें, बल्कि सरकार द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी लें और उनका लाभ उठाएं।

अमेठी में ‘मिशन शक्ति’ कार्यक्रम में शामिल हुईं अपर्णा यादव

अपर्णा यादव अमेठी के रामलीला मैदान में आयोजित ‘मिशन शक्ति’ (Mission Shakti) के विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने मंच से महिलाओं और युवतियों को जागरूक करते हुए सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।

युवाओं को संदेश देते हुए अपर्णा यादव ने कहा, “आजकल ज्यादातर युवाओं के पास स्मार्टफोन होता है। कई युवा अपना सारा समय फोन पर ‘रील्स’ देखने में बिता देते हैं। मैं उन्हें यही सलाह दूंगी कि वे रील्स देखने की बजाय लड़कियों और महिलाओं के लिए बनी सरकारी नीतियों के बारे में जानें, उनके लिए आवेदन करें और जरूरत पड़ने पर उसका लाभ उठाएं।”

सरकार महिलाओं को कर रही है सक्षम और आत्मनिर्भर

अपर्णा यादव ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के प्रति पूरी तरह सजग है। सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सक्षम बना रही है। इसलिए जरूरी है कि बेटियां और महिलाएं जागरूक हों और इन योजनाओं का पूरा फायदा उठाएं। उन्होंने ‘मिशन शक्ति’ अभियान को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम बताया।

यूपी में चल रहा है ‘मिशन शक्ति’ का छठा चरण

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को समर्पित ‘मिशन शक्ति’ अभियान का छठा चरण चल रहा है, जिसकी शुरुआत 11 अक्टूबर से हो चुकी है।

इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं:

  • महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक करने के लिए रैलियां निकाली जा रही हैं।
  • कई जिलों में होनहार बेटियों को एक दिन के लिए सांकेतिक रूप से प्रशासनिक पदों (प्रमुख पदों) पर बैठाकर उन्हें कर्तव्य बोध कराया जा रहा है, ताकि उनका आत्मविश्वास और अधिक मजबूत हो सके।

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