
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक शराब ठेकेदार सेक्टर-2 निवासी प्रवीण बंसल ने छह अक्तूबर को शिकायत दी थी कि उससे बदमाशों की ओर से रंगदारी देने के लिए धमकियां मिल रही हैं। इस कारण उसे पुलिस सुरक्षा मिली हुई है। हिमांशु उर्फ भाऊ गैंग के कई साथियों की शराब ठेकों में हिस्सेदारी है।
एडीजीपी वाई पूरण कुमार के कथित सुसाइड केस में चंडीगढ़ की एसआईटी ने डीएसपी गुलाब सिंह, अर्बन एस्टेट थाने के तत्कालीन प्रभारी इंस्पेक्टर नीरज कुमार व शिकायतकर्ता शराब ठेकेदार प्रवीण बंसल से 10 घंटे तक पूछताछ की। चंडीगढ़ पुलिस के मुख्यालय में 29 दिसंबर को दोपहर 2 बजे से रात 12 बजे तक पूछताछ चली।
छह अक्तूबर 2025 को अर्बन एस्टेट थाने में एडीजीपी वाई पूरण कुमार के गनमैन रहे हवलदार सुशील कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। अगले दिन आरोपी सुशील कुमार को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया जहां से न्यायिक हिरासत के चलते जेल भेज दिया गया था। उसी दिन सात अक्तूबर को चंडीगढ़ में एडीजीपी वाई पूरण कुमार ने सुसाइड कर लिया था।
एडीजीपी की पत्नी आईएएस अमनीत पी कुमार की ओर से चंडीगढ़ पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि छह अक्तूबर को साजिश के तहत रोहतक के अर्बन एस्टेट थाने में एडीजीपी के गनमैन के खिलाफ एफआईआर नंबर 319 दर्ज की गई है। तब वाई पूरण कुमार के पास सुनारिया पीटीसी के आईजी का भी चार्ज था।
शराब ठेकेदार ने ये लगाए थे आरोप, नरेंद्र सिंह बिजारणिया थे एसपी
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक शराब ठेकेदार सेक्टर-2 निवासी प्रवीण बंसल ने छह अक्तूबर को शिकायत दी थी कि उससे बदमाशों की ओर से रंगदारी देने के लिए धमकियां मिल रही हैं। इस कारण उसे पुलिस सुरक्षा मिली हुई है। हिमांशु उर्फ भाऊ गैंग के कई साथियों की शराब ठेकों में हिस्सेदारी है। एक पुलिसकर्मी ने फोन करके उसे आईजी ऑफिस में मिलने बुलाया था। साथ ही खुद को आईजी का खास आदमी बताया।
आरोप है कि सुशील कुमार ने शराब ठेकेदार से ढाई लाख रुपये मंथली मांगी। रोहतक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी गनमैन को गिरफ्तार कर लिया था जिसकी जमानत हो चुकी है। उस समय रोहतक एसपी पद पर आईपीएस नरेंद्र सिंह बिजारणिया थे जबकि अर्बन एस्टेट थाने के डीएसपी गुलाब सिंह, थाना प्रभारी इंस्पेक्टर नीरज कुमार थे। एसपी बिजारणिया को अब करनाल में एसपी लगाया गया है जबकि नीरज कुमार को एक माह पहले पुलिस लाइन में भेजा जा चुका है।
चंडीगढ़ की एसआईटी के कुछ सवाल और अफसरों के जवाब
एसआईटी : आरोप है कि एडीजीपी पर दबाव बनाने के लिए गनमैन के खिलाफ साजिश के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस अफसर : शराब ठेकेदार की शिकायत पर कार्रवाई की गई। किसी तरह की साजिश के आरोप निराधार हैं।
एसआईटी : एफआईआर दर्ज करते समय क्या-क्या तथ्य देखे गए।
पुलिस अफसर : शिकायतकर्ता ने ऑडियो, वीडियो व दूसरे दस्तावेज दिए हैं। दस्तावेज की जांच कर कार्रवाई की गई।
एसआईटी : केस में एडीजीपी वाई पूरण कुमार की कोई भूमिका सामने आई या नहीं।
पुलिस अफसर : जांच पड़ताल जारी है। अभी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।
एसआईटी : एडीजीपी के गनमैन के खिलाफ किस आधार पर शिकायत दी।
शराब ठेकेदार : उसके कार्यालय में आकर ढाई लाख मंथली मांगी। जांच टीम को ऑडियो व वीडियो भी उपलब्ध कराई गई है।
10 घंटे हुई पूछताछ, अकेले में भी हुए सवाल
एसआईटी चंडीगढ़ ने 29 दिसंबर को दोपहर करीब दो बजे से रात 12 बजे तक रोहतक पुलिस के डीएसपी, एसएचओ व शराब ठेकेदार ने करीब 10 घंटे पूछताछ की। जांच टीम के सदस्यों ने तीनों से एक साथ सवाल किए। इसके बाद अलग-अलग अधिकारी ने अलग-अलग पूछताछ की। पूरी प्रक्रिया करीब 10 घंटे चली। दोनों पुलिस अफसरों व शराब ठेकेदार के बयान दर्ज कर भेज दिया गया।
अब तक का घटनाक्रम
6 अक्तूबर : एडीजीपी एवं उस समय सुनारिया पुलिस अकादमी के आईजी वाई पूरण कुमार के गनमैन सुशील कुमार के खिलाफ अर्बन एस्टेट थाना रोहतक में एफआईआर दर्ज।
7 अक्तूबर : एडीजीपी ने चंडीगढ़ स्थित आवास में की आत्महत्या। उसी दिन आरोपी गनमैन को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। जहां से न्यायिक हिरासत के चलते भेजा गया जेल।
7 दिसंबर : आरोपी गनमैन सुशील कुमार को मिली जमानत, दो माह में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी एसआईटी रोहतक



